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| By Abtadka |
UPI नियमों पर आधारित है जो 3 नवंबर 2025 से लागू हुए हैं। साथ ही, इसमें पिछले कुछ महीनों में हुए अन्य महत्वपूर्ण बदलावों की भी जानकारी दी गई है।
UPI नए नियम 2025: यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) ने भारत के डिजिटल लेनदेन का लैंडस्केप बदल दिया है। सिस्टम को और भरोसेमंद, तेज़ और स्केलेबल बनाने के लिए, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) लगातार नए दिशा-निर्देश जारी कर रहा है। इनमें से सबसे महत्वपूर्ण बदलाव 3 नवंबर 2025 से लागू हुआ है, जो सेटलमेंट प्रक्रिया को फिर से परिभाषित करता है। इस ब्लॉग पोस्ट में, हम 3 नवंबर के नए सेटलमेंट नियमों, 15 सितंबर से लागू हुईं बढ़ी हुई ट्रांजैक्शन लिमिट और 1 अगस्त से लागू हुए ऑपरेशनल बदलावों पर हिंदी और इंग्लिश में विस्तृत जानकारी देंगे।
🤔 नवंबर का बदलाव: क्या है और क्यों है जरूरी?
वर्तमान में, UPI एक दिन में 10 सेटलमेंट साइकिल चलाता है, जिनमें ऑथराइज्ड ट्रांजैक्शन (मंजूर किए गए भुगतान) और डिस्प्यूट ट्रांजैक्शन (विवाद/रिफंड से जुड़े लेनदेन) एक साथ प्रोसेस होते हैं। ट्रांजैक्शन के बढ़ते वॉल्यूम को देखते हुए, अब इन दोनों प्रकार के लेनदेन को अलग-अलग साइकिल में प्रोसेस करने का फैसला लिया गया है ।
नई सेटलमेंट साइकिल (3 नवंबर 2025 से लागू)
साइकिल नंबर समय (Time) प्रकार (Type)
1 से 10 सुबह 9 बजे से रात 9 बजे तक (2-2 घंटे के विंडो में) केवल ऑथराइज्ड ट्रांजैक्शन
DC1 (11) रात 12 बजे से दोपहर 4 बजे तक केवल डिस्प्यूट ट्रांजैक्शन
DC2 (12) दोपहर 4 बजे से रात 12 बजे तक केवल डिस्प्यूट ट्रांजैक्शन
Key Points:
· आम यूजर्स के लिए फायदा: अब आपके रोजमर्रा के पेमेंट (जैसे दुकान पर भुगतान, P2P ट्रांसफर) और तेजी से सेटल होंगे क्योंकि वे डिस्प्यूट के लेनदेन से अलग प्रोसेस होंगे ।
· रिफंड की प्रेडिक्टेबिलिटी: अगर आपका कोई पेमेंट फेल हो जाता है या आपको रिफंड की जरूरत पड़ती है, तो उसका सेटलमेंट अब दिन में दो बार, डेडिकेटेड डिस्प्यूट साइकिल (DC1 या DC2) में होगा। इससे पता चल सकेगा कि रिफंड कब तक अकाउंट में आ सकता है ।
· बैंकों के लिए आसानी: बैंकों के लिए लेनदेन का हिसाब-किताब (रिकंसिलिएशन) करना आसान हो जाएगा, जिससे सिस्टम की कार्यक्षमता बढ़ेगी ।
💰 15 सितंबर से बढ़ी ट्रांजैक्शन लिमिट: अब कर सकते हैं बड़े पेमेंट
15 सितंबर 2025 से, कुछ खास श्रेणियों के लिए प्रति लेनदेन की सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दी गई है, जबकि दैनिक cumulative limit 10 लाख रुपये तक जा सकती है । यह बदलाव बड़े डिजिटल भुगतानों को बढ़ावा देने के लिए है।
बढ़ी हुई ट्रांजैक्शन लिमिट वाली केटेगरीज
श्रेणी (Category) प्रति लेनदेन सीमा प्रतिदिन की सीमा
कैपिटल मार्केट (निवेश) ₹5 लाख ₹10 लाख
बीमा प्रीमियम (Insurance Premium) ₹5 लाख ₹10 लाख
सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) ₹5 लाख ₹10 लाख
ट्रैवल (Travel) ₹5 लाख ₹10 लाख
क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान ₹5 लाख ₹6 लाख
ज्वेलरी (Jewellery) ₹2 लाख ₹6 लाख
एजुकेशन और हॉस्पिटल ₹5 लाख ₹5 लाख
नोट: आम P2P (पर्सन-टू-पर्सन) ट्रांजैक्शन की लिमिट 1 लाख रुपये प्रतिदिन ही बनी हुई है ।
⚙️ 1 अगस्त से लागू हुए ऑपरेशनल बदलाव: सेफ्टी और एफिशिएंसी के लिए
1 अगस्त 2025 से कुछ ऐसे नियम लागू हुए हैं जिनका उद्देश्य UPI सिस्टम को अधिक स्थिर और सुरक्षित बनाना है । ये बदलाव ज्यादातर बैकएंड और यूजर एक्सपीरियंस से जुड़े हैं।
· बैलेंस चेक की लिमिट: अब आप किसी एक UPI ऐप पर एक दिन में सिर्फ 50 बार ही अपना बैंक बैलेंस चेक कर सकते हैं। लिमिट पार होने पर अगले 24 घंटे तक बैलेंस चेक नहीं हो पाएगा ।
· ऑटो-पेमेंट का नया शेड्यूल: ऑटो-डेबिट मैंडेट (जैसे SIP, सब्सक्रिप्शन) अब सिर्फ नॉन-पीक आवर्स में प्रोसेस होंगे: सुबह 10 बजे से पहले, दोपहर 1 से 5 बजे के बीच, और रात 9:30 बजे के बाद ।
· लिंक्ड अकाउंट्स देखने की लिमिट: आप एक दिन में 25 बार से ज्यादा अपने लिंक्ड बैंक अकाउंट्स की लिस्ट नहीं देख सकते ।
· पेंडिंग ट्रांजैक्शन स्टेटस: किसी पेंडिंग ट्रांजैक्शन का स्टेटस आप सिर्फ 3 बार चेक कर सकते हैं, और हर कोशिश के बीच कम से कम 90 सेकंड का गैप जरूरी है ।
· इनएक्टिव UPI आईडी: अगर कोई UPI ID 12 महीने तक इस्तेमाल नहीं होती, तो उसे डिएक्टिवेट कर दिया जाएगा ।
🔍 इन बदलावों का आप पर क्या पड़ेगा असर? (User Impact)
· आम यूजर के लिए: रोजमर्रा के पेमेंट और तेज और स्मूद होंगे। रिफंड की प्रक्रिया में अधिक स्पष्टता आएगी। हालांकि, बैलेंस चेक और अकाउंट लिंकिंग जैसी आदतों पर थोड़ा कंट्रोल रखना होगा।
· बिजनेस और मर्चेंट्स के लिए: 5 लाख रुपये तक के UPI पेमेंट मिलने से हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन (जैसे ज्वेलरी, टूर पैकेज, इंश्योरेंस) को बड़ी राहत मिलेगी। सेटलमेंट का नया सिस्टम उनके लिए अकाउंटिंग को भी आसान बनाएगा।
· बैंकों और फिनटेक कंपनियों के लिए: सिस्टम का बोझ कम होगा, रिकंसिलिएशन आसान होगा और वे कस्टमर्स को बेहतर सर्विस दे पाएंगे।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q1: क्या अब भी UBI पर पर्सनल P2P पेमेंट फ्री हैं?
जी हां, बैंक अकाउंट से बैंक अकाउंट में किए जाने वाले पर्सनल P2P पेमेंट पूरी तरह फ्री हैं ।
Q2: अगर मैं बैलेंस चेक की डेली लिमिट पार कर लेता हूं, तो क्या होगा?
अगर आप एक दिन में 50 बार से ज्यादा बैलेंस चेक करते हैं, तो अगले 24 घंटे के लिए उस ऐप पर मैन्युअल बैलेंस चेक का ऑप्शन ब्लॉक हो जाएगा। हालांकि, ट्रांजैक्शन करने के बाद बैलेंस ऑटो-डिस्प्ले हो जाएगा, यह सुविधा बनी रहेगी ।
Q3: क्या क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट की लिमिट भी बढ़ी है?
जी हां, 15 सितंबर से क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट की प्रति लेनदेन सीमा बढ़ाकर 5 लाख रुपये और दैनिक लिमिट 6 लाख रुपये कर दी गई है ।
Q4: क्या ये सभी बदलाव सभी UPI ऐप्स पर लागू होंगे?
जी हां, ये सभी बदलाव NPCI के दिशा-निर्देश हैं, इसलिए ये सभी UPI ऐप्स जैसे Google Pay, PhonePe, Paytm, BHIM और सभी बैंकिंग ऐप्स पर लागू होंगे ।
निष्कर्ष
यूपीआई में हो रहे ये बदलाव दिखाते हैं कि भारत का डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम लगातार विकास की ओर बढ़ रहा है। 3 नवंबर का सेटलमेंट सिस्टम में बदलाव, 15 सितंबर को बढ़ाई गई लिमिट और 1 अगस्त के ऑपरेशनल अपडेट्स मिलकर यूपीआई को अधिक मजबूत, तेज और उपयोगकर्ता के लिहाज से बेहतर बना रहे हैं। इन नियमों से न सिर्फ आम उपयोगकर्ताओं को फायदा होगा, बल्कि व्यापार और देश की अर्थव्यवस्था को भी गति मिलेगी।
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कृपया ध्यान दें: यह जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध स्रोतों पर आधारित है। नियमों में किसी भी तरह के बदलाव के लिए आधिकारिक NPCI/ RBI नोटिफिकेशन ही अंतिम माने जाएंगे।

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